मैं पंद्रह वर्षीय किशोर था उन दिनों । कॉलेज बंक करके यह फिल्म देखी थी। फिल्म के गीत, कथानक, अभिनय, फिल्मांकन इतने बेहतरीन थे कि आज भी यह फिल्म दिल के बेहद करीब है। .. फिल्म के अंत में राष्ट्रगान का बजना और सभी का राष्ट्रगान के सम्मान में खड़ा होना, एक अदभुत अहसास था। .. क्रांति के बीच पुष्पित-पल्लवित होता ' प्रेम ' ... और एक अल्हड़ प्रेमी का हार्डकोर राष्ट्रप्रेमी और क्रांतिकारी में परिवर्तन .. और भी बहुत कुछ ... विधु विनोद चोपड़ा जी ने बॉलीवुड को इस सिनेमा के रुप में एक अनमोल रत्न और अद्भुत कृति दी थी ।
775likes89repliesSep 3, 2022
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