ये गीत जब भी कहीं बजता है और इस गीत की पहली लाइन नटखट बंसीवाले गोकुल के राजा कानों में पड़ती है। तो एक अलग ही अलौकिक अनुभूति का अहसास होता है जैसे कि पृथ्वी के कण-कण से ये आवाज़ आ रही हो। ऐसा लगता है कि हम फिर से उस मनमोहन, चितचोर, माखनचोर ग्वाल-बालों के सखा उस मुरलीधर, गिरधारी, कृष्ण कन्हैया, बाल गोपाल और माधव कि जन्मभुमि ब्रज धाम में पहुंच गये है जहां सृष्टि का हर छोटे से बड़ा प्राणी, जीव, जन्तु, वनस्पति, अग्नि, जल, वायु, धरती और आकाश ना जाने कितनी सदियों से उनके वापिस अवतरित होने कि राह देख रहे हैं। ना जाने कब वो समय आएगा जब वो स्वर्ण और सात्विक काल वापिस आएगा। अब तो बड़ी से लेकर छोटी-छोटी बच्चियों के साथ भी दुष्कर्म और दुराचार हो रहे हैं प्रभु आप सब देख रहे हैं तो फिर अब नही तो कब आओगे "हे माधव" 🙏
628likes58repliesAug 22, 2023
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