मेरी गेल पढ़े छोरे बिश्नोईयाँ के भतेरे, इसे कर के या गाड़ी रे मुकाम ले फ़िरां। 1730 की खेजड़ली की घटना इतिहास में दर्ज है, जब बिश्नोई समाज ने पेड़ों और प्रकृति की रक्षा के लिए बलिदान दिया। उस वक्त आसपास के जाट किसान भी इस अन्याय के खिलाफ साथ खड़े थे। यही है जाट-बिश्नोई भाईचारे की सच्ची मिसाल । Respect for our roots
6.8Klikes205replies+8/dayJan 8, 2026
- On channel
- #4
- Overall
- #35,851
- Video views
- 129.7M
